Firdaus Diary

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Firdaus Khan


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तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगे…

Posted On: 25 Aug, 2016  
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कविता में

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राहुल गांधी : एक मुकम्मल शख़्सियत

Posted On: 19 Jun, 2016  
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होलिया में उड़े रे गुलाल…

Posted On: 20 Mar, 2016  
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रोज़ेदार

Posted On: 27 Jun, 2015  
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या ख़ुदा तूने अता फिर कर दिया रमज़ान है…

Posted On: 26 Jun, 2015  
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गूलर के पेड़…

Posted On: 6 Jun, 2015  
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शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैन…

Posted On: 3 Nov, 2014  
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मां, तुझे सलाम…

Posted On: 11 May, 2014  
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चांदनी रात में कुछ भीगे ख़्यालों की तरह…

Posted On: 9 Jan, 2014  
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कविता में

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तू मेरे गोकुल का कान्हा, मैं हूं तेरी राधा रानी…

Posted On: 9 Jan, 2014  
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कविता में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आदरणीया फिरदौस जी, राहुल गांधी के इतने सारे गुणों से आपने परिचय कराया जिसे मीडिया भी आजकल नहीं दिखाता या बताता है. समय सबका एक सा नहीं रहता, अभी राहुल गांधी या कहें की कांग्रेस के बुरे दिन चल रहे हैं इसलिए सब कुछ मोदीमय दीखता है. जब जनता मोदी जी और उनके भक्तों से ऊब जाएगी तो हो सकता है राहुल गांधी के अच्छे दिन आएंगे! बहरहाल विपरीत समय में आपने एक अच्छे आलेख से सबको रूबरू कराया इसके लिए आपका अभिनन्दन ! इस लेख पर प्रतिक्रिया भी अच्छी आयी है, पता नहीं आदरणीया डॉ.शोभा भरद्वाज जी की नजर इस आलेख पर क्यों नहीं पडी या या उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देनी उचित नहीं समझी. आपको पुन: अभिनन्दन!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आपका लेख पढ़कर सुखद आश्चर्य हुआ फ़िरदौस जी । यह सचमुच बड़े अचरज की बात है कि इस मंच पर राहुल गाँधी के गुणों को देखने वाले भी उपस्थित हैं । आपके द्वारा की गई उनकी प्रशंसा अतिशयोक्तिपूर्ण तो लगती है लेकिन आपने जो तथ्य दिए हैं, उन्हें भी अनदेखा नहीं किया जा सकता । राहुल गाँधी ऐसे एकमात्र भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जिसने दलित परिवारों के घर जाकर उनके साथ भोजन किया है और उनके झोपड़ों में रात्रि-विश्राम किया है । ऐसा तो दलितों के स्वयंभू हितैषियों ने भी नहीं किया है जो उन्हें मात्र वोट-बैंक मानते हैं । राहुल अपरिपक्व हैं, वोट कबाड़ने की कला से अनभिज्ञ हैं और दो टूक कहूँ तो भारतीय राजनीति के लिए अनुपयुक्त भी लगते हैं लेकिन उनका मन साफ़ है । वोट लेने के लिए वे झूठी बयानबाज़ी और छल-कपट नहीं करते । अपने राजनीतिक विरोधियों का उल्लेख भी सम्मानपूर्वक करते हैं जो उनके उदात्त संस्कारों की ही पहचान है । अपनी विदेशी प्रेमिका से विवाह न करके जनता और अपने दल के लिए उन्होंने निजी स्तर पर जो त्याग किया है, वह अनमोल है जिसके लिए दुर्भाग्यवश कोई उन्हें श्रेय नहीं देता है । वे चुनावी राजनीति में पिछड़ चुके हैं लेकिन सत्य पर अडिग रहने और अपने एवं अपनी त्यागमयी माता पर लगाए गए झूठे लांछनों का दृढ़तापूर्वक सामना करने के लिए वे सराहना के अधिकारी हैं । उन्हें सालगिरह मुबारक और आपको भी मुबारक कि सरकार के पैरोकारों और राहुल के मुखालिफ़ों के दरमियां आपने बेखौफ़ होकर अपनी बात बेलाग कही । आपकी कलम को मेरा सलाम ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

बहुत सार्थक,शिक्षाप्रद और उपयोगी रचना.आपको बहुत बहुत बधाई.आप ने सही कहा है-कहते हैं कि एक व्यक्ति बहुत तेज़ घुड़सवारी करता था. एक दिन ईश्वर ने उस व्यक्ति से कहा कि अब ध्यान से घुड़सवारी किया करो. जब उस व्यक्ति ने इसकी वजह पूछी तो ईश्वर ने कहा कि अब तुम्हारे लिए दुआ मांगने वाली तुम्हारी ज़िन्दा नहीं है. जब तक वो ज़िन्दा रही उसकी दुआएं तुम्हें बचाती रहीं, मगर उन दुआओं का साया तुम्हारे सर से उठ चुका है. सच, मां इस दुनिया में बच्चों के लिए ईश्वर का ही प्रतिरूप है, जिसकी दुआएं उसे हर बला से महफ़ूज़ रखती हैं. मातृ शक्ति को शत-शत नमन…इसमें तुम्हारी के बाद माँ लफ्ज टाइपिंग में छूट गया है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मां संवेदना है, भावना है, अहसास है मां जीवन के फूलों में, खूशबू का वास है मां रोते हुए बच्चे का, खुशनुमा पालना है मां मरूस्थल में नदी या मीठा-सा झरना है मां लोरी है, गीत है, प्यारी-सी थाप है मां पूजा की थाली है, मंत्रो का जाप है मां आंखों का सिसकता हुआ किनारा है मां ममता की धारा है, गालों पर पप्पी है, मां बच्चों के लिए जादू की झप्पी है मां झुलसते दिनों में, कोयल की बोली है मां मेंहदी है, कुंकम है, सिंदूर है, रोली है मां त्याग है, तपस्या है, सेवा है मां फूंक से ठंडा किया कलेवा है मां कलम है, दवात है, स्याही है मां परमात्मा की स्वयं एक गवाही है मां अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है मां जिंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है मां चूड़ी वाले हाथों के, मजबूत कंधों का नाम है मां काशी है, काबा है, और चारों धाम है मां चिन्ता है, याद है, हिचकी है मां बच्चे की चोट पर सिसकी है मां चूल्हा, धुआं, रोटी और हाथों का छाला है मां जीवन की कड़वाहट में अमृत का प्याला है मां पृथ्वी है, जगत है, धूरी है मां बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है मां का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता मां जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता

के द्वारा: tejwanig tejwanig

के द्वारा: jalaluddinkhan jalaluddinkhan

के द्वारा: एम. अफसर खां सागर एम. अफसर खां सागर

के द्वारा: skjaiswalskj skjaiswalskj

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: deepak bisht deepak bisht

कला कद्रदानों से जिवीत रहती है कलाकारों से नही । सरकार दुसरी तरिके की मदद कर सकती है उस कला को आगे नही बढा सकती । कलाका रों को धन कमाने वाली कलामें शिफ्ट हो जाना चाहिये या नया धंधा अपना लेना चाहिए । और कोइ रास्ता नही । कला को संस्क्रुति के साथ नही जोडना चाहिए । कद्रदान ही कला भोगना नही चाहता तो कला को तो मिटना ही है । पूरानी कला जाती है नई कला आती है । सिनेमा आया नाटक गया, टीवी आया सिनेमा पर असर पडा, फेसबूक आया टीवी पर असर पडा । जनमानस के मूड से चलता है सब । जनमानस को संस्क्रुतिसे कोइ लेनादेना नही । हमारी मानसिकता में थोडी खोट है । आदमी शहेरों से दूर बसता हो और गरीब हो तो उसे आदिवासी कह दिया जाता है । जब की वो आदीकाल में नही हमारे साथ ही जन्मा है । गरीब है, कपडे नही खरीद पाता, कम कपडा पहनना उस की मजबूरी है ईस कारण वो आदीवासी नही बन जाता । विचारों की बात करे तो शहरमें भी कौन नही है विचारों के आदीवासी । भारत में बहुत से धंधे परंपरा से चले आ रहे हैं । वो सब धंधे हैं । ग्राहक है तबतक चलेंगे । संस्क्रुति जैसे भावनात्मक शब्द बचा नही पायेगा जब ग्राहक नही मेलेगा ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

के द्वारा: Ajay Kumar Dubey Ajay Kumar Dubey

दिनेश आस्तिक जी, महापुरुषों के व्यक्तिगत जीवन (PERSONAL INTEREST ) से जन कल्याण (PUBLIC INTEREST) का महत्त्व अधिक होता है | सीता को जंगल में नहीं महर्षि बाल्मीकि के आश्रम के पास छोड़ा गया था | हनुमान जानते थे की लव जिन्हों लवपुर ( लाहौर ) बसाया और कुशपुर (कस्सूर ) जिन्हों ने बसाया गया राम के बेटे थे इस लिए योधा हनुमान लव-कुश को कोई हानी किये बिना पेड़ के साथ रस्सी से बांध गए | मिथ्या (MYTH) से सत्य को अलग करना पड़ता है (ONE HAS TO SEPARATE GRAIN FROM THE CHAFF) राष्ट्र की रक्षा और उन्नति व्यक्ति, कुछ लोगों या एक समुदाय से अधिक होती है | गर्भित सीता ने स्वयं फोरेस्ट में रहने की इच्छा व्यक्त की थी हाँ यह हो सकता है कि जन कल्याण के अंतर्गत राजनीति में सीता कि मर्जी यां राये न ली गयी हो | ऐसा नहीं होता कि धरती फट जाये और सीता उसमे समा जाये | इन शब्दों का यही अर्थ निकलता है कि सीता अयोध्या में वापसी के बाद अंडर ग्राउंड हो गई दुसरे शब्दों में सीता आम जनता के सामने नहीं आती THI (SEETA AVOIDED PUBLIC LIFE) | आप किसी क सर तो कट सकते हैं पर किसी की जुबान नहीं पकड़ सकते |

के द्वारा: ASK ASK

महापुरुषों के व्यक्तिगत जीवन (PERSONAL INTEREST ) से जन कल्याण (PUBLIC INTEREST) का महत्त्व अधिक होता है | सीता को जंगल में नहीं महर्षि बाल्मीकि के आश्रम के पास छोड़ा गया था | हनुमान जानते थे की लव जिन्हों लवपुर ( लाहौर ) बसाया और कुशपुर (कस्सूर ) जिन्हों ने बसाया गया राम के बेटे थे इस लिए योधा हनुमान लव-कुश को कोई हानी किये बिना पेड़ के साथ रस्सी से बांध गए | मिथ्या (MYTH) से सत्य को अलग करना पड़ता है (ONE HAS TO SEPARATE GRAIN FROM THE CHAFF) राष्ट्र की रक्षा और उन्नति व्यक्ति, कुछ लोगों या एक समुदाय से अधिक होती है | गर्भित सीता ने स्वयं फोरेस्ट में रहने की इच्छा व्यक्त की थी हाँ यह हो सकता है कि जन कल्याण के अंतर्गत राजनीति में सीता कि मर्जी यां राये न ली गयी हो | ऐसा नहीं होता कि धरती फट जाये और सीता उसमे समा जाये | इन शब्दों का यही अर्थ निकलता है कि सीता अयोध्या में वापसी के बाद अंडर ग्राउंड हो गई दुसरे शब्दों में सीता आम जनता के सामने नहीं आती THI (SEETA AVOIDED PUBLIC LIFE) | आप किसी क सर तो कट सकते हैं पर किसी की जुबान नहीं पकड़ सकते |

के द्वारा: ASK ASK

फिरदौस खान जी नमस्कार , आपने बड़ी खोज बीन के बाद एक ज्वलंत मुद्दे पर लिखा हैं..............सराहनीय हैं , आखिर क्यूँ बनते हैं , ऐसे सम्बन्ध कौन हैं .................................. ..........इन सब के पीछे जिम्मेदार ..क्या मिडिया ,नेट या अवैध संबंधो को सामान्य या सहज तरीके से लोगों की रोजमर्रा जिंदगी में दिखाने वाले धारावाहिक ....................................... रिमोट तो हमेशा अपने ही हाथ में होता हैं ...............सुबह सुबह उठकर समाचारपत्र के मुख पृष्ठ पर चोरी हत्या ,बलात्कार की खबरे पढ़ना  या ना पढ़ना ,अपने ही हाथ में हैं .............. इन्टरनेट चालू करके कम्प्यूटर से जोड़ना होता हैं .......... यानी सब कुछ अपने हाथ में हैं .................सकारात्मकता चुने या नकारात्मकता ..... अश्लील साहित्य इंसान को जानवरों के स्टर से भी नीचे गिरा देते हैं ,और आज एक क्लिक पर हज़ारो पेज अश्लील साहित्य हैं और विश्व की उच्च दर्जे की .........एक हिरोइन हमारी फिल्म इंडस्ट्री में भी आ चुकी हैं ,भट्ट साहेब के कैम्प में ......... बालीबुड की फिल्मे,भोजपुरी की फिल्मे , देख लीजिए ...हास्य के नाम पर द्विअर्थी सवांद .....अश्लील फुह्द्प्न ............. कहीं ना कहीं ये सब लोगों के अवचेतन मन में जा रहां हैं और उपजाऊ मन कई गुणा करके लौटा रहा हैं..... परिणाम स्वरुप छेड़खानी ,बलात्कार ,यहाँ तक की घरेलू महिलायें भी महफूज नही हैं ........... औरतो का उन्मुक्त आचरण भी इसी चीज का परिणाम हैं ........ http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/07/02/आधुनिक-शिक्षा-का-यह-रूप-भी/

के द्वारा: ajaykr ajaykr

बेटी फ़िरदौस ख़ान एक धर्मात्मा वोह व्यक्ति होता है जो अपने कर्त्तव्य कर्मो भलीभांति निभाता है | एक से अधिक औरतों से सम्बन्ध नहीं बनता | उतने ही बच्चे पैदा करता है जितनो का सही पालन - पोषण कर सके और रोटी, कपर और मकान का प्रबंध कर सके | एक महात्मा होता है जो अपने लिए नहीं अपितु समाज, देश, धर्म (universal religion), राष्ट्र, और सारे संसार के लिए जीता है | 'वासुदेवाये कुटुम्बकम' उसके लिए 'सारा जहाँ है मेरा और मै सारे जहाँ का हूँ मत पूछ मेरा है कौन वतन और मै कहाँ का हूँ | महापुरुषों का जीवन दूसरों के लिए होता है और आर्यन संस्कृति, वैदिक संस्कृति, अर्थात 'मनुर भव' संस्कृति ( इन्सान बनो कर लो भलाई का कोई काम) के अनुसार राम की प्राथमिकता आदर्श राज्य जिसे बाद में रामराज्य कहा गया कायम करने की थी | अगर राम सीता के चरित्र पर सामाजिक छींटाकसी और पारिवारिक समस्यायों में उलझे रहते तो आदर्श राज्य कैसे स्थापित होता | सीता की सहमति से राम सीता से अलग हुये और उस तपस्वी रजा राम के जीवन में भी कोई औरत और नहीं थी | उपकार पुरुषोत्तम श्रीराम सब के लिए हमारे लिए आदरणीय हैं | कृष्ण और चाणक्य का जीवन भी अपनी अपनी जगह सर्वोपरि हैं | जैसे श्री कृष्ण ने, जरासंध से खतरा भांप कर, मथुरा त्याग कर द्वारिका चले गए थे, वैसे हजरत महामेध साहिब ( enlightened one ) नबी ( Messenger ) ने भी मक्का त्याग मदीना में शिरकत की थी | कृष्ण से योग और गीता तो नबी से कुरान प्राप्त हुआ | यह अलग है की लोग कुरान शरीफ के अलग - अलग अर्थ निकलते हैं जैसे इस्लाम में जिहाद | महामेध साहिब मक्का - मदीना में एक क्रांतिकारी नज़र आते हैं और हिंदुस्तान पर हमला करने वाले लुटेरे नज़र आते हैं | इतिहास में कोई भी एक दुसरे जैसा नहीं होता, क्यूं की सब की परिस्थितियां/ हालात अलग - अलग होते हैं | दर्शन शर्मा |

के द्वारा: ASK ASK

फिरदौस जी, बेस्ट बलॉगर बनने पर हार्दिक बधाई, आप का लेख छीन-बीन होते सामाजिक ताने-बाने का एक सही चरित्रण है। लेकिन आज समाज में मर्यादाओं को खुंटी पर टांग दिया है। आपकी बात सही है कि अदालते केवल लोगों को सजा तो दे सकती है। लेकिन उनकी मानसिक स्थिति को नहीं बदल सकती। आज आधुनिकता ने लोगों को इतना गिरा दिया है। कि पुरातन मर्यादाओं का खुले आम जलुस यथा-तथा हर गली- कुच्चे में देखने को मिल जाता है। मैं समझता हूं कि इस में डबल बैड परम्परा और टी.वी. और फिल्मों में दिखया जाने वाला फुहड़पन और नंगापन है। जब बच्चों को बचपन से ही कामुकता और सैक्स उत्तेजना का मसाला परौसा जाएगा। तो सम्भाविक है कि बड़े होने पर उनकी कमुकता और सैकस के प्रति आकर्षण बड़ेगा घटेगा नहीए बढ़ेगा। इस बात को आज नजरान्दाज नहीं किया जा सकता, कि लड़कियां का भड़किली पोशाके पहन कर सार्वजनिक स्थनों पर जाना और निकलता आग में घी का काम करती हैं। इसलिए समाज को आमर्यादित करने में जितना हाथ पुरुषों का है उससे कहीं अधिक औरतों का भी है। मानव की प्रर्वीत है कि वो सुन्दरता के प्रति आकर्षित होता है। विपरीत सैक्स का खिंचाव दूसरे के प्रति न चाहते हुए भी हो जाता है। इस में समय और परिस्थतियों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। कहा भी जाता है-कि पुरातन सदैव अच्छा होता है।

के द्वारा: rafiq rafiq

मोहिन्दर जी ... इसी दुनिया में...इसी समाज में ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें सजदा करने को दिल चाहता है... यह अल्लाह का बहुत बड़ा करम है कि हमारी ज़िन्दगी में ऐसे लोग शामिल हैं... हम ऐसे लोगों पर लिखते रहे हैं... इंशा अल्लाह आने वाले दिनों में अपने इस ब्लॉग में भी इस तरह की तहरीरें पोस्ट करेंगे... तब तक इंतज़ार कीजिए...हमारी अगली पोस्ट का... यह सोच ठीक नहीं है कि ऐसे मुद्दे उठाने से कुछ होने वाला नहीं है... (टिप्पणियां मिलना या न मिलना किसी तहरीर की सार्थकता को कम या ज़्यादा नहीं करता है...और पत्रकार हैं...हमारा काम लिखना है...टिप्पणियां पाने के लिए हम नहीं लिखा करते हैं ) जागरूकता के लिए ऐसे मुद्दों को उठाया जाना बेहद ज़रूरी है... वरना हमारी बहन-बेटियां ऐसे ही बर्बाद होती रहेंगी... अगर हमारे मुल्क के स्वतंत्रता सेनानी भी यही सोचकर बैठ जाते कि अंग्रेजों से कौन लड़े, तो आज हम आज़ाद हिंदुस्तान में सांस नहीं होते... बहरहाल, आपने अपने विचार रखे...उसके लिए शुक्रिया...

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

आदरणीया फिरदौस जी, सादर अभिवादन! अच्छे संस्कार एक मां ही देती है. एक अच्छी बेटी ही एक अच्छी पत्नी साबित होती है…और एक अच्छी पत्नी ही एक अच्छी मां बनती है, .लेकिन जो महिला ख़ुद ही किसी मासूम के क़त्ल की वजह हो, उसने अपने बच्चों को क्या संस्कार दिए होंगे कहने की ज़रूरत नहीं. वो कहानी तो सुनी होगी, जिसमें राजकुमारी अपने राज्य में मेहमान के तौर पर आए राजकुमार के से साथ भाज जाना चाहती है. राजकुमार घोड़ा ख़रीदने जाता है. घोड़े वाले उसे घोड़े दिखाते हुए तेज़ दौड़ने वाली घोड़ी की क़ीमत बहुत कम बताता है. राजकुमार जब इसकी वजह पूछता है तो घोड़े वाला कहता है कि यह पानी देखकर रुक जाती है. इसी तरह इसकी मां और नानी भी पानी देखकर रुक जाया करती थी. यह सुनकर राजकुमार सोचता है कि आज राजकुमारी अपने पिता की गरिमा को धूल में मिलाकर मेरे साथ भाग जाना चाहती है. कल इसकी बेटी भी ऐसा ही करेगी. यह ख़्याल आते ही राजकुमार वापस अपने देश लौट जाता है. यह कहानी मैंने भी सुनी थी. एक वह समय था, जब मनुष्य (राजकुमार) एक जानवर से सीख ले लेता था और आज हम बुराइयों को ही ज्यादा ग्रहण कर रहे हैं. आपके साहसिक लेख पर मिले सम्मान के लिए आपको बधाई!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

मधुर जी आपका हार्दिक अभिनन्दन... हमने देखा है नाजायज़ रिश्तों को लेकर भारतीय समाज में पुरुषों पर तो सब अंगुलियां उठा देते हैं, मगर हवस की भूखी महिलाओं का क्या? जिस देश में ‘सीता-सावित्री’ जैसी देवियां हुई हैं, उस देश में ऐसी महिलाओं की भी कमी नहीं जो अपने बेटे की उम्र के लड़कों के साथ अवैध संबंध रखती हैं .बेशर्मी की हद तो यह कि उन लड़कों से कहती हैं कि उनके लिए ‘करवा चौथ’ का व्रत रखा है .कभी सावित्री ने यह नहीं सोचा होगा कि इस ‘पवित्र व्रत’ के नाम पर इतना ‘अधर्म’ होगा? बहुत तकलीफ़ होती है, यह सब देखकर... हम आपके तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हैं...कि आपने एक ज्वलंत मुद्दे पर अपने विचार रखे...

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

शैलेश जी आपका हार्दिक अभिनन्दन... नाजायज़ रिश्तों को लेकर भारतीय समाज में पुरुषों पर तो सब अंगुलियां उठा देते हैं, मगर हवस की भूखी महिलाओं का क्या? जिस देश में ‘सीता-सावित्री’ जैसी देवियां हुई हैं, उस देश में ऐसी महिलाओं की भी कमी नहीं जो अपने बेटे की उम्र के लड़कों के साथ अवैध संबंध रखती हैं .बेशर्मी की हद तो यह कि उन लड़कों से कहती हैं कि उनके लिए ‘करवा चौथ’ का व्रत रखा है .कभी सावित्री ने यह नहीं सोचा होगा कि इस ‘पवित्र व्रत’ के नाम पर इतना ‘अधर्म’ होगा? वैसे 'कुलटा' को कुलटा लिखने में क्या बुराई है... जो महिला किसी का घर तोड़े... अपने बेटे की उम्र के लड़कों से साथ मुंह काला करे... उसके लिए तो शायद कुलटा शब्द भी कम है... आपने एक ज्वलंत मुद्दे पर अपने विचार रखे, इसके लिए हम आपके तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हैं...

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

आदरणीय आपका हार्दिक अभिनन्दन... हम आपके तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हैं कि आपने इतने अच्छे विचार रखे... हम तो यही मानते हैं, कि चरित्रहीन व्यक्ति की कहीं कोई इज़्ज़त नहीं होती... वो तभी तक किसी का सम्मान पा सकता है, जब तक किसी को उसकी मालूम न हो... उसकी असलियत पता चलते ही वो नज़रों से गिर जाएगा... कहते हैं कि कोई पहाड़ से गिरकर तो उठ सकता है, लेकिन किसी की नज़रों से गिरकर कभी नहीं उठ सकता... हैरत होती है कि बूढ़ी औरतें अपने बेटे की उम्र के मर्दों के साथ नाजायज़ रिश्ते बनाती हैं, लानत है ऐसी औरतों पर... (जिन दिन उनके पति और बच्चों को उनकी करतूतें पता चलेंगी, वो उनके मुंह पर थूकेंगे भी नहीं...) जो लोग जो अपनी मां की उम्र की औरतों के साथ मुंह काला करते हैं... पता नहीं उनकी सगी मां और बहन कैसे उनसे बची रहती होंगी...पिछले दिनों एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी सगी मां के साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की...अपनी बहन, बुआ, मामी, मौसी, दादी और सास के साथ ज़बरदस्ती करने के मामले सामने आते ही रहते हैं... लानत है ऐसे हवस के दरिन्दों पर... मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हमारे लिए आदरणीय हैं... अगर सीता को नहीं त्यागते तो क्या कहने थे...बस यही बात खटकती है... वैसे श्रीराम जैसा पुरुष इतिहास में दूसरा नहीं हुआ है... कृपया अन्यथा न लीजिएगा... हम न तो स्त्री वेश्यालय के पक्षधर हैं और न ही पुरुष वेश्यालय के... जहां तक बात भूलने की है, तो इंसान को कुछ भी नहीं भूलना चाहिए... क्योंकि अगर वो इसी तरह भूलता रह तो ज़िन्दगी में बार-बार ठोकर खता रहेगा... आपकी पत्नी रेखा जोशी जी का भी हम हार्दिक अभिनन्दन करते हैं उनके तहे-दिल से शुक्रगुज़ार भी हैं...

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

बेटी फ़िरदौस ख़ान - आपने समाज के बहुत ही गम्बीर मुद्दे को उठाया है | वेद भी यही कहता है ' मनुर भव:' अर्थात पैदा होने से ही संतान मनुष्य नहीं बन जाती केवल संस्कारों को ग्रहन करने से ही मनुष्य मनुष्य बनता है| राजा भ्रतहरी ने अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को अपनी रानी पिंगला के चरित्र पर शक जाहिर करने पर और उसके बाद रानी द्वारा देवर के चरित्र पर बुरी नज़र रखने का इल्जाम लगाने पर देश निकाला दे दिया | बाद में अपनी प्यारी रानी की करतूतों और अवैध संबंधों का पता चलने पर राजपाठ सब छोड़ अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को राजपाठ देकर सन्यास लेलिया | दोनों भाई ही संस्कृत ( संस्कारों से कृत, संस्कृति वाली भाषा } के महान विद्वान थे | भ्रतहरीजी जी अपने श्लोक लिखते हैं :- येषाम ना विद्या ना तपो ना दानं ज्ञानं ना शीलं गुणों ना धर्मा | ते मृतर्य लोके भूवि भार भूता मनुष्य रूपेण न्म्रिगाश चरन्ति || मनुष्य रूपेण मृगाश चरन्ति अर्थात ऐसे मनुष्य केवल रूप से -शक्ल से मनुष्य नज़र आते हैं चरित्र से वोह जानवर हैं | भ्रष्ट राजनेता तो भेड़ की खल में भेड़िये हैं | सच है की हवस इंसान को जानवर बना देती है और हवस में अंधे सामाजिक मान-मर्यादा को भूल मां-बेटे और भाई-बहन जैसे पाक [ पवित्र ] रिश्तों को भी कलंकित कर देते हैं | ऐसे सम्बंधों में उनको तसल्ली रहती है कि कोई उन पर शक नहीं करेगा और घर की बात घर में ही रह जाएगी | ’टेस्ट’ बदलने के लिए के लिए व्याभिचार को मैंने भी देखा है, जब सिलचर ( असाम } में सिलचर गुप्त पुलिस विभाग के एक अधीक्षक ने एक कंवारी सिपाही से उसकी तरक्की के लिए ’ टेस्ट’ बदलने के लिए' अपना मुह काला करने की इच्छा जाहिर की | अच्छे चरित्र के कानून क्या कर सकते है | किरण बेदी जैसी देवी - देवतायों ने जेलों में काफी हद तक सुधार किये अंततः ' आस की किरण ' किरण बेदी को भी वक़्त से पहले नौकरी से अवकाश लेना पड़ा | चाणक्य कहते हैं ' कृतं सपध्यते चरण ' अर्थात अच्छे काम के लिए यह कदम रूकने नहीं अपितु चल पड़ने चाहिए | वेदों वाली { having moral values of Vedas } बेदी अब भी अच्छा काम कर रही हैं और उनकी किरणे अब भी प्रकाश फैला कर भ्रष्टाचार के अँधेरे के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं | सत्य है की अच्छे संस्कार एक मां ही देती है | एक अच्छी बेटी ही एक अच्छी पत्नि और एक अच्छी मां साबित होती है | वेद कहता है ' माता निर्माता भवति ' | माता ही देश, जाती, धर्म { universal religion अर्थात इंसानियत } का निर्माण करने वाली है | ‘वासना’ “प्रेम-प्यार” कदाचित नहीं | अपने सच कहा वासना’ को ‘प्रेम के आवरण' से छुपाया नहीं जा सकता | प्यार तो एक पवित्र बंधन है जिसमें एक दुसरे के प्रति पवित्र प्यार और त्याग की भावना होती है | एक दुसरे का ख्याल रखा जाता है | प्यार के बंधन में वासना का कोई स्थान नहीं | प्यार राह दिखाता है भटकाता नहीं | शादी दो आत्माओं का मिलन है और पवित्र बंधन है | राम कहते है की मेरा सीता का बंधन वोह बंधन है की जैसे दो जल मिल कर एक हो जाते हैं | ‘सीता-सावित्री’ जैसी देवियां आज देश में कष्ट भोगती हैं और अवैध संबंध रखने वाले बेशर्म और भ्रष्टाचारी खुले घूमते हैं, अपनी रोटी सकते हैं और खुद ही अपना कन्धा थप -थपाते हैं | आपने सच कहा नाजायज़ रिश्ते का अंजाम बहुत ही घृणित होता है | बुरे काम का बुरा नतीजा | ऐसे कर्म करते हूए भय, शंका और लज्जा होती है | हवस का मारा हुआ और घ्रणित कार्य करने वाला पहले व्यक्ति पहले अपनी नज़रों में गिरता है फिर पड़ोस, रिश्तेदार, दोस्त और फिर पुरे समाज की | आओ दुआ करें कि ईश्वर हमारी बहु -बेटियों को हवस के दरिन्दों से बचाकर रखे…पिता, पति औत पुत्र रक्षा करें | आमीन ! एवमस्तु ! जो बीत गयी सो बीत गयी उस तीर का शिकवा कौन करे | जो तीर कमान से निकल गया उस तीर का पीछे कौन लगे | मैं अपने भाई की इस बात पर सहमत नहीं हूँ | बीत गए पर शिकवा करना ही पड़ता है | इतिहास से आदमी बहुत कुछ सीखता है | हाँ आगे से जगण्य अपराधों वा गलतियों से बचें | और कोई गलत काम किया है तो प्रायश्चित करे, नुकसान की बरपायी करें ऊख्ड़ों को फिर बसायें , बिछड़ों को फिर मिलायें | चित्रों को नहीं चरित्रं को पूजें | संत तुलसीदासजी ने रामचरित मानस लिखा है, ना की रामचित्र मानस | वेदों में केवल पञ्च जीवित मूर्तियों की पूजा है - १. माता २. पिता, ३. आचार्य (सचा - निस्वार्थ गुरु / गाइड) ४. अतिथि (मेहमान) जिसकी कोई तिथि नहीं होती और कभी कभी ही आता है ना की आप पर बोझ बन जाता है और जिसके आने से आपको हमेशा ज्ञान और ख़ुशी मिलती है | ५. पत्नी के लिए पति और पति की लिए पत्नी | महापुरुषों की मूर्तियों और मरों की कब्रों की पूजा से कुछ भी नहीं मिलता | परमपिता परमात्मा की बनायीं दुनिया को खूबसूरत बनाओ इन्सान बनो और सब का भला करो | पर-नारी मात्री शक्ति अर्थात दुसरे की बहु - बेटी को माँ, बहिन और बेटी के रूप में देखो | ऐसे विचारों से सामाजिक संबंधों में पवित्रता आ जाएगी | योग दर्शन कहता है ' योगाश्च चित वृति निरोधः ' अर्थात चित की वृतियों को रोको कर्त्तव्य कर्मो और यथार्थ उद्देश्यों की और लगायें | पुरुषों के लिए स्त्री वैष्यालय और स्त्रीयों के लिए पुरुष वैष्यालय की मांग गलत, अश्लील और अवैध है | समलैंगिकों के लिए तो अलग जजीरे अर्थात टापू होने चाहिए नहीं तो वोह अपनी गंधगी से समाज को गंधा कर देंगे | पुरुषों के लिए स्त्री वैष्यालय और स्त्रीयों के लिए पुरुष वैष्यालय की मांग गलत, अश्लील और अवैध है । लडके शादी करने से ही डर जाये ऐसे तलाक के कानून (IPC 498A) बनाना भी सरासर गलत है । मेरी पत्नी रेखा जोशी ने अलग से आपको लिखती रहों,शुभकामनाएं ! दी हैं |

के द्वारा: ASK ASK

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

फिरदोस जी, नमस्कार, आपकी हिम्मत की दाद देता हूँ, कि आपने एक महिला होते हुए भी महिलाओं के क्रियाकलापों से समाज को शर्मसार करने वाले एक कटु सत्य को सबके सामने पेश किया है. समाज की विकृत मानसिकता को उजागर करती एक उत्कृष्ट रचना, नाजायज़ रिश्तों पर एक बेहतरीन और कारगर हमला है आपकी यह रचना. क्युकी नाजायज़ रिश्ते कई ज़िन्दगियों की खुशियों को लील जाते हैं! यह बिलकुल सुच है कि जो महिला अपने पति और बच्चों की न हुई तो उस लड़के कि क्या होगी.? जिस महिला को अपनी और अपने परिवार की मान-मर्यादा का ख़्याल नहीं तो वह किसी और की इज्ज़त का क्या ख़्याल करेगी? बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक का ख़िताब मिलने पर हार्दिक शुभकामनायें.... मधुर भारद्वाज http://madhurbhardwaj.jagranjunction.com/

के द्वारा: Madhur Bhardwaj Madhur Bhardwaj

फ़िरदोस जी, समाज में अगर बुरे लोग हैं तो बहुत से इतने अच्छे भी है कि जिनके बारे में लिखा जा सकता है.. दुख है तो इतनी खुशियां भी है जो काविले जिक्र हैं. आज कल अखबार में देखो तो दंगों, मौत और ब्लातकार को बढा चढा कर मुख्य पेज पर छापा जाता है. क्या हम इतने गोण हो गये हैं कि दुनिया में अच्छा बचा ही नहीं है. आपके लेख में भी बही पुरानी अखबारों के किस्से हैं पर इसका जिक्र नहीं कि इसके खिलाफ़ क्या किया जा सकता है या हमारा क्या रोल है. ऐसे लेखों से चाहे लोगों की भावनायें थोडी देर के लिये जागें परन्तु कुछ खास होने वाला नहीं है... हां टिप्पणियां अवश्य मिल जायेंगी. आज हर कोई अपनी परेशानियों से इतना घिरा हुआ है कि उसे दूसरों की परेशानी परेशानी नहीं लगती... वह कुछ ऐसा चाहता है जिसे देख कर, पढ कर उसे सकून मिले, समाज का उजला चेहरा देखने को मिले...आशा है आपकी अगली पोस्ट में कुछ ऐसा ही होगा.

के द्वारा: Mohinder Kumar Mohinder Kumar

फिरदौस जी, सादर नमन, हमारे समाज का बदलता घिनौना (या यूं कहें कि तथाकथित आधुनिक) चेहरा......... बिलकुल दुरुस्त फ़रमाया आपने. आज रिश्ते किस दहशत में जी रहे है, खास कर मासूम लड़कियों के साथ; "वासना की तपन लगी हर वय को, रिश्तों के ढांचे चरमराये. .कूकने से अब कोयल भी डरती है, आम कहीं सच्ची न बौरा जाये. .कलुषित हो रहे है अब जो सम्बन्ध, मासूमों के दिल दहलायें. .'बचपन' चिहुंका यौवन की देहरी पर, क्या पहने? क्या ओढ़े? कित डोले, क्यूं इठलायें? .मेला ठेला हो या हो सावन बसंत, उन्मुक्त सा वो कैसे हँसे? कैसे मुस्काए?" -----हम आपके साथ दोहराते है "आओ दुआ करें कि ईश्वर हमारी बहन-बेटियों को, उनकी ज़िन्दगी को हवस के दरिन्दों (महिला हो या पुरुष) से बचाकर रखे… आमीन" मेरे ब्लॉग 'टेलीविजन पर एडल्ट फिल्मों का प्रदर्शन..." पर आपकी राय अपेक्षित है.

के द्वारा: Rahul Nigam Rahul Nigam

अजय जी ऐसे कई लोग हैं, जो शादीशुदा और बच्चों वाले हैं, लेकिन उन्होंने सोशल नेटवर्क साइट्स पर ख़ुद को सिंगल के तौर पर पेश किया है... ज़ाहिर है, ऐसा करने वाला व्यक्ति अच्छा इनसान तो हो नहीं सकता... ऐसे लोगों का मक़सद लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर उनका शोषण करना होता है, वो चाहे भावनात्मक हो या भी शारीरिक... हम अकसर सोचते हैं, जो लोग दूसरों की बहन-बेटियों की ज़िन्दगी तबाह करते हैं...ऐसे लोगों की बहन-बेटियां भी कभी सुखी नहीं रह पाती होंगी...क्योंकि पीड़ित के दिल से यही हाय निकलती है कि तेरी बहन-बेटी के साथ भी ऐसा ही हो... और कहीं न कहीं होता भी होगा...आख़िर वो भी तो किसी के जाल में फंस सकती हैं...

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

लखनऊ के मिजाज़ को शकील बदायूंनी ने कुछ इस तरह भी कहा है जो आपकी मोहब्बत-ए-लखनऊ में और इज़ाफा कर दीवानगी के रंग भर देगी. ऐ शहरे लखनऊ तुझे मेरा सलाम है तेरा ही नाम दूसरा जन्नत का नाम है...... मेरे लिए बहार भी तू गुलबदन भी तू परवाना और शम्मा भी तू अंजुमन भी तू जुल्फों की तरह महकी हुई तेरी शाम है.... कैसा निखार तुझमे है क्या क्या है बांकपन ग़ज़लें गली गली है तो नगमें चमन चमन शायर के दिल से पूछ तेरा क्या मकाम है..... तू है वो लोग शहरे निगारा कहे जिसे फिरदौस-ए-हुस्न रश्क-ए-बहारा कहे जिसे तेरी हर एक अदा में वफ़ा का पयाम है....... लखनऊ की ढेर सारी जानकारी के लिए भी शुक्रिया. आप मुझे http://rahulnigam.jagranjunction.com/ पर पा सकती है.

के द्वारा: Rahul Nigam Rahul Nigam

फिरदोस जी तस्लीम मैंने यह मुद्दा अपने जनप्रतिनिधियों को दिया था और अधिकारीयों को दिया था पर वह कोई कारवाई नहीं करते और लोग परेशान हो रहे हैं कह रहे हैं की किसी पत्रकार को यहाँ बुलाइए तभी यह जनप्रतिनिधि जागेंगे वरना नहीं यह शोचालय हटना ही चाहिए यह बिमारी की जड़ है अभी अभी वहां की पार्षद रेखा रानी जी आई थी पर उन्होंने भी नहीं सुना जनप्रतिनिधि कुछ नहीं करते में अपने शेत्र के प्रति जागरूक हूँ इसीलिए आपसे कहना चाहता हूँ कृपया समय निकालकर आईये और जनप्रतिनिधियों से सवाल करिए की टोइलेट क्यों नहीं हटा विधायक श्री साहब सिंह चौहान जी के घर चलिए या इस मुद्दे को स्टार न्यूज़ agency के ब्लॉग में छापिये और इस शोचालय को हटवाकर पुरे भजनपुरा शेत्र को अनुग्रहित करिए अगर आप अखबार में छाप देंगी और शोचालय हट जाएगा तो में इसमें आपका आभार समझूंगा समस्या का त्वरित निपटान कीजिये बस येही कहना है आपसे समस्या के निपटान की आशा में आपका भाई अजय पाण्डेय

के द्वारा: ajay kumar pandey ajay kumar pandey

फिरदोस जी तस्लीम सही कहा आपने बाबा रामदेव जी को अपनी दूकान ही चलानी है वह अपनी दवाइयां किताबें यह सब महंगी क्यों हैं और रामदेव जी की दवाई एक बार अगर खाली तो कुछ और बिमारी हो जाती है एक बार मैंने रामदेव जी का आरोग्य तेल खाया उससे मेरा पेट ख़राब हो गया फिरदोस जी आप स्टार न्यूज़ agency के ब्लॉग में बाबा रामदेव जी से प्रश्न कीजिये की रामदेव जी आपने दवा क्यों महंगी की हैं किताबें क्यों महंगी हैं यह सब आप पूछियेगा वैसे बाबा रामदेव अपनी दूकान ही चलाएंगे और आपसे एक गुजारिश और है चूँकि आप एक बड़ी पत्रकार हैं तो कभी स्टार न्यूज़ agency से कभी समय निकालकर हमारे शेत्र भजनपुरा आईये वहां का मुद्दा यह है की वहां पर एक शोंचालय है हमारे स्कूल के पास वहां से बदबू आती है तो लोगो को नाक बंद करके जाना पड़ता है तो आप जरा आईये और स्टार न्यूज़ agency को इसकी रिपोर्ट सोपिये यहाँ से वह शोचालय शीघ्र हटना चाहिए बिमारी की जड़ है आशा है आप मेरे शेत्र भजनपुरा में आएँगी और इस समस्या का त्वरित निपटान करेंगी ऐसी आशा है धन्यवाद आपका भाई अजय पाण्डेय

के द्वारा: ajay kumar pandey ajay kumar pandey

फिरदोस जी तस्लीम अर्ज मुझे आपका यह तहरीर पढ़कर आज facebook और अन्य sites के खतरे के बारे में पता चला सच कहूँ तो virtual दोस्ती खतरनाक भी होती है और सही भी कई बार पति भी status अपडेट नहीं करते हैं तो बीबियाँ चिड जाती हैं और इसी कारन तलाक हो जाते हैं बज्म ऐ करीम में यही कहना चाहूँगा की जहाँ तक बात आती है सोसिअल नेट्वोर्किंग sites पर दोस्ती की तो यह दोस्ती बहुत खतरनाक होती है और सही भी इस दोस्ती के दोनों पक्ष हैं इन sites पर बातें सोच समझकर करनी चाहिए यह तो पता नहीं फिरदोस जी की मेरे में अच्छे लेखन के गुण हैं या नहीं आप एक बड़ी पत्रकार हैं तो आपकी इस तहरीर पर ज्यादा राय न देते हुए यही कहूँगा की virtual दोस्ती सोच समझकर ही हो लोगो को भी सावधान रहना चाहिए खासकर पतियों को अपने status में maried लिखना चाहिए ताकि तलाक न होने पाएं और सुखी जीवन जी सकें तहरीर पसंद आई आपका धन्यवाद एक ज्ञानवर्धक तहरीर के लिए धन्यवाद

के द्वारा: ajay kumar pandey ajay kumar pandey

कोई महिला अपने स्टेट्स में कुछ भी लिख दे, फ़ौरन उसे ‘लाइक’ करेंगे, कमेंट्स करेंगे और उसे चने के झाड़ पर चढ़ा देंगे.हो सकता है...... शायद मेरा भी कमेन्ट भी इसीलिए हो........ खैर, faebook या अन्य सोशल websites किसी प्रकार के नए संबंधो को बनाने के लिए प्रमाणिक नहीं है और न ही विश्वसनीय है और न ही इनकी कोई विधिक अनुशसा की गई है. इसे टाइम पास और केवल अपने जानने वालों के मध्य पोपुलर वेबसाइट के रूप में व्यवहार में लाया गया है. जैसे सडक पर या बाहर निकलते समय हमें विबिन्न प्रकार के खतरों से सावधान रहने को कहा जाता है उसी प्रकार इन websites को इस्तेमाल करते समय हमे कई सावधानियां बरतनी पड़ती है. इनका आँख मूँद कर use करने वाले अक्सर मुसीबत में फंस जाते है. आपका लेख ऐसे लोगो के लिए बेहद मददगार साबित होगा ऐसा मेरा मानना है और इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना भी हा कि इसके इस्तेमाल करने वालो को सदबुद्धि भी दे. धन्यवाद उपयोगी सूचना और लेख के लिए.

के द्वारा: Rahul Nigam Rahul Nigam

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

के द्वारा: Firdaus Khan Firdaus Khan

फिरदौस  जी मुझे लगता है कि सच्चा इश्क  एक  तरह का  पागलपन  ही है। यह इंसान का जीवन तबाह कर देता है।  आदमी पर अपने ऊपर  नियंत्रण  नहीं रहता है। खुदा का  नाम  लेता है तो महबूब का नाम  निकलता है। कुछ  भी  ख्यालों में महबूब या महबूबा के सिवा और कुछ  भी नहीं आता। जो भी सोचता, बोलता या लिखता है शायरी बन जाती है। उसे भुलाने की जितना सोचते हो वह उतना ही याद आता है।  खुदा ऐसी मुहब्बत  से इस  दुनियाँ को बचाये। कभी कभी मैं सोचता हूँ  कि दुनियाँ  में जिस  खुदा की बातें  होती हैं कहीं वह खुदा तो नहीं है।  कवि घनानंद  का जीवन  तथा उनकी रचनायें पढ़ने से तो  ऐसा ही लगता है। प्रेमिका द्वारा ठुकरा दिये जाने पर वृंदावन जाकर प्रेमिका को कृष्ण  का रूप दे दिया और उसकी आराधना करने लगे।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय बहन  फिरदौस  जी, आदाब। मंच  पर आपका स्वागत है।नील  नदी के संबंध  में विस्तृत जानकारी देने के लिये आभार, किन्तु क्षमा माँगते हुये ईश्वर  के संबंध  में कहीं गई बातें मेरी समझ  के परें हैं। इसका कारण  मेरा आस्तिक  होना, ईश्वर की अनुपलब्धता, सृष्टि में अशुभ  का होना। एक  सबसे प्रमुख  कारण यह है कि उस के होने का एक  भी प्रमाण  मनुष्य  को आज  तक प्राप्त न हुोना, किन्तु न होने के अनगिनत  प्रमाण  उपलब्ध हैं। मैंने भी उसे खोजने के अनेक  प्रयास  किये, मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा आदि में खोजा, नहीं मिला। वेद, कुरान, बाइविल  आदि पुस्तकों का भी साधारण  अध्ययन   किया, लेकिन  फिर भी नहीं मिला। हाँ ईश्वर के नाम  से जो मंदिर-मस्जिद  टूटे, ईश्वर के नाम से जो दंगे हुये (वर्तमान में गोधरा काण्ड), वहाँ जरूर उसने अपनी उपलब्धता  दर्ज  करवाई। मेरा मानना है कि हमारा केवल  एक  ही धर्म  है मानवता, बाकी जिन्हे हम धर्म  कहते हैं वास्तव  में वे सम्प्रदाय हैं (हिन्दु, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आदि। मैं नहीं समझ  पाता हूँ कि जब उसने हमें इंसान बनाया तो हम  इंसान  बनकर क्यों नहीं रहते क्यों हिन्दु, मुसलमान आदि सम्प्रदायों में बट जाते हैं। इंसान तो अच्छी तरह बन नहीं पाये हिन्दु मुसलमान  बनने का दंभ  भरते हैं। मैं करता हूँ सदा ईश्वर से सवाल  तूने हमें जन्म  से ही हिन्दु, मुसलमान या  ईसाई क्यों नहीं बनाया। यदि तूँ ऐसा करता तो मेरा तेरे अस्तित्व पर सवाल  उठाने का कोई आधार  नहीं  होता। ज्ञान  वर्धक  आलेख  के लिये बधाई। निवेदन है कि अन्य  लोगों के विचार भी पढ़े  और उन्हें अपने विचारों से अवगत  करायें, इससे लोग  आपके आलेख   की तरफ   आकर्षित  होंगे।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik




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